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वर्षकुण्डली (Year Chart)

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image वर्षकुण्डली (Year Chart)

जातक/जातिका (Native) के नये वर्ष में प्रवेश करने पर वर्षकुण्डली का निर्माण किया जाता है. जन्म समय जो भी लग्न (Lagna at the time of birth) आये परन्तु प्रत्येक वर्ष जन्म तिथि (Birth Tithi) पर लग्न बदल जाता है लगभग दो लग्नो का अन्तर पड् जाता है, क्या यह युक्तिसंगत है,

इस लेख के माध्यम से इसी विषय पर विचार किया जायेगा. सूर्य एंव पृथ्वि की गति में प्रतिवर्ष 6 घंटे कुछ मिनट का अन्तर (Six minutes difference in the movement of Sun and Earth) रहता है. इसी गति को मानकर लग्न ज्ञात किया जाता है जिससे कि दो से तीन लग्नों का अन्तर पड् जाता है, अब वर्षकुण्डली में जातक/ जातिका (Native) का लग्न जन्म लग्न से अन्य होता है. इसी वर्षकुण्डली में मुद्या दशा (Mudya Dasha) भी दी होती है, जो कि विंशोत्तरी महादशा (Vinshotari Mahadasha) से अलग होती है. यदि हम इन तथ्यों को सही मान ले तो फिर जन्मांग कुण्डली का कोइ महत्व नहीं. तथा उससे जुडे अन्य पहलू भी अप्रसांगिक हो जायेगे यह गहन विचार करने का विषय है.

लेखक जो कि स्वंय भी ज्योतिर्वेद है के अनुभव के आधार पर जातक/ जातिका (Native) के जन्म लग्न में कोइ परिवर्तन नहीं होना चाहिये तथा गोचर (Transit) में ग्रहो की स्थिति के अनुसार ही फलित(Predict) कहना चाहिये. विंशोत्तरी दशा में भी परिवर्तन नहीं किया जा सकता अतः मुद्या दशा महत्वहीन है , इसलिए वर्षकुण्डली में जन्म लग्न को परिवर्तित किये बिना ही फल कथन (Phal kathan) कहना चाहिये.

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