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ग्ण्डमूल नक्षत्र क्या होते हैं. (What are Gandamoola Nakshatras)
वैदिक ज्योतिष में नक्षत्र का बहुत महत्व होता है. नक्षत्र कुछ सितारों का समूह होता है जो अन्तरिक्ष में स्थिर अवस्था में है. नक्षत्र 27 होते हैं. प्रत्येक ग्रह अपने परिभ्रमन (Movement through its orbit) के दौरान नक्षत्रों से होकर ही गुजरता है. ग्रहो की संख्या 9 है तथा नक्षत्रो की 27 होने से प्रत्येक ग्रह तीन नक्षत्रो का स्वामीत्व स्वीकार करता है.
जन्मकुण्डली में विंशोत्तरी दशा (Vimshottari Dasha) का आधार भी नक्षत्र ही है. जन्म समय चन्द्रमा कौन से नक्षत्र से गुजर रहा है, उसी नक्षत्र से महादशा(Mahdasha) प्रारम्भ होती है. 27 नक्षत्रो में से 6 नक्षत्र गण्डमूल (Gandamula Nakshatra) कहलाते हैं. अश्वनी, मघा ओर मूल ये तीन नक्षत्र केतु के अन्तर्गत आते हैं तथा आश्लेषा (Ashlesha), ज्येष्ठा (Jyestha) ओर रेवती (Revati) ये तीन बुध ग्रह के नक्षत्र कहलाते हैं.
गण्डमूल नक्षत्र (Gandmula Nakshatra) क्रुर स्वभाव के माने जाते हैं. जीवन के प्रारम्भिक अवस्था में ये नक्षत्र कुछ परेशानिया उत्पन्न करते हैं परन्तु मध्य काल के पश्चात बहुत ही सुखद परिणाम देते हैं. नक्षत्रो के बिना वैदिक (Vedic Jyotish) ज्योतिष की कल्पना भी नहीं की जा सकती. फलादेश (Phaladesh) कथन में हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि राशी में ग्रह का भ्रमण स्थूल फल प्रदान करता है जबकि नक्षत्र में ग्रह का भ्रमण सूक्ष्म फल प्रदान करता है. प्रत्येक नक्षत्र को चार भागों मे़ बाँटा जाता है जिन्हे पाद या चरण (Nakshatra Charan) कहते हैं.
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