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ज्योतिष ओर विज्ञान का आपस में सम्बन्ध ( Relationship Between Vedic Jyotish And Science)
प्रत्येक घटना का कोई आधार होता है. यहाँ पर कुछ सामान्य प्रश्न उठते हैं जैसे कि क्या ज्योतिष विज्ञान है ( Is astrology a science) ? ग्रह हमें किस प्रकार प्रभावित करते हैं? रत्न ओर अंगुठी कैसे हमारे भाग्य में परिवर्तन लाते है? तन्त्र विज्ञान का ज्योतिष में क्या योगदान है? क्या निराकरण ज्योतिष ( Remedial Astrology ) तथ्यपुर्ण है? बुद्धिजीवियों के साथ परिचर्चा में बहुत सारे प्रश्न सामने आते हैं.
प्रत्येक घटना का कोई आधार होता है. यहाँ पर कुछ सामान्य प्रश्न उठते हैं जैसे कि क्या ज्योतिष विज्ञान है ( Is astrology a science) ? ग्रह हमें किस प्रकार प्रभावित करते हैं? रत्न ओर अंगुठी कैसे हमारे भाग्य में परिवर्तन लाते है? तन्त्र विज्ञान (Occult Science ) का ज्योतिष में क्या योगदान है? क्या निराकरण ज्योतिष ( Remedial Astology ) तथ्यपुर्ण है? बुद्धिजीवियों के साथ परिचर्चा में बहुत सारे प्रश्न सामने आते हैं.
मुख्यतः ज्योतिष को समझने के दो दृष्टिकोण हैं 1.) पारंम्परिक ज्योतिष ( Traditional Astrology ) 2.) तार्किक ज्योतिष (Logical Astrology). किसी विषय वस्तु की जानकारी का अभाव होने पर उसके अस्तित्व से इन्कार करना ही पर्याप्त नहीं है. परंम्परिक ज्योतिष में मुख्यतः फलित ज्योतिष ( Predictive Astrology ) एवं निराकरण ज्योतिष का प्रयोग होता है तथा बिना किसी जाँच पडताल के उन परम्पराओ का अनुसरण किया जाता है. उनमें से कुछ घटनाऎं उम्मीदो पर खरी उतर सकती है तथा कुछ अन्य नहीं क्योंकि यह सब ज्योतिर्वेद के ज्ञान (Knowledge of Vedic astrology ) एवं अनुभव पर निर्भर करता है।
तार्किक ज्योतिष के सम्बन्ध में एसा नहीं है, यहाँ हर बात का परीक्षण वैज्ञानिक स्तर पर होता है. तार्किक ज्योतिष में सबसे अधिक जोर खगोल विज्ञान (Astronomy ) पर दिया जाता है, ग्रहो नक्षत्रो की दुरी एवं गति का माप टेलीस्कोप से किया जाता है, फिर गणित के आधार भविष्यवाणी की जाती है तत्पश्चात उन भविष्यवाणियो को तर्क की कसोटी पर कसा जाता है. इसलिए इसमें अन्धविश्वास की कोइ जगह नहीं है. तथा इसके आधार पर की गयी अधिकतर भविष्यवाणियाँ सत्य की कसौटी पर खरी उतरती है.
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