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क्यों होती है भविष्यवाणी ग़लत? (Why are Pridictions Often untrue?)
अपूर्ण ज्योतिष ( Incomplete Astrology ) के आधार पर की गई भविष्यवाणी की सत्यता का प्रतिशत क्या होगा यह आप स्वयं समझ सकते हैं। इस प्रकार से की गई भविष्यवाणी सत्य भी हो सकती है और झूठी भी. आधी- अधूरी भविष्यवाणी क्या कारण है यहां हम इसकी चर्चा करने जा रहे हैं।
इस श्रंखला के अन्तर्गत हम आपको ज्योतिष के उन पहलुओ की जानकारी देंगे जो कि अपने आप में अपूर्ण है. अपूर्ण ज्योतिष ( Incomplete Astrology ) के आधार पर की गई भविष्यवाणी की सत्यता का प्रतिशत क्या होगा यह कोइ नहीं बता सकता, यानि कि वह भविष्यवाणी सत्य भी हो सकती है और मिथ्या भी. आखिर ऎसे वो कौन से विषय है जिनके आधार पर कुछ ज्योतिषी आधी- अधूरी भविष्यवाणी करते हैं. इन्ही सब बातो का उल्लेख इस लेख में किया गया है.
केवल नाम के आधार पर राशी मानना (Acceptance of Sign On the Basis of Name )
जब किसी बच्चे का जन्म होता है तो बच्चे के माँ-बाप प्रायः उनकी जन्मकुण्डली (Birth Chart ) बनवाने के लिए ज्योतिषी की शरण लेते हैं। ज्योतिर्वेद (Astrologer ) उस बच्चे के जन्म दिन (Birthday ) के नक्षत्र (Nakshatra ) एवं राशि की गणना करके , नामाक्षर ज्ञात करके बच्चे का नामकरण किया करते हैं। नाम व राशी (Sign) बच्चे की वास्तविक राशि होती है. परन्तु ऎसा भी देखा जाता है कि व्यक्ति अक्सर अपने मन के अनुसार पसंद आने वाला कोई भी नाम रख लेते हैं, अब उसी नाम के अनुसार अपनी राशि मान लेते हैं. लेकिन यह वास्तविक राशी नहीं होती है.
जब भी व्यक्ति को शनि की साढेसती (Sadhesati ) या ग्रहण (Grahan ) लगेगा तो वो उस व्यक्ति की वास्तविक राशि के आधार पर लगेगा चाहे व्यक्ति अपनी वास्तविक राशी से अनभिज्ञ ही क्यों न हो। व्यक्ति किसी बीमारी से ग्रस्त हो जाये, तो चाहे वो उस बीमारी के नाम को जानता हो या न जानता हो , उसका दुष्परिणाम (Bad Effect ) तो भुगतना ही होता है कुछ इसी प्रकार की स्थिति लाभ-हानि के सम्बन्ध में व्यक्ति की होती है।
यहाँ पर जो मुख्य प्रश्न सामने आता है वह यह है कि जब कोइ प्रसिद्ध नाम वाला व्यक्ति अपनी समस्या को लेकर किसी ज्योतिषी के पास जाता है तो ज्योतिषी जी उसके प्रसिद्ध नाम के आधार पर भविष्यफल बता देते हैं, ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से यह अधूरा और ग़लत तरीका कहा जाएगा। इसे हम एक उदाहरण से समझ सकते हैं. भगवान श्री राम और रावण दोनो ही नाम के अनुसार तुला (Libra) राशि के हैं, तो युद्ध के अंत में जिस दिन लंका के राजा रावण का वध हुआ, उस दिन तुला राशी अच्छी थी या खराब. यदि अच्छी थी तो रावण क्यों मरा और यदि खराब थी तो भगवान श्री राम को विजय क्यों प्राप्त हुई. यही स्थिति भगवान श्री कृष्ण और कंस के नाम के सन्दर्भ में भी है, क्योकि दोनो की राशि मिथुन ( Gemin ) बनती है तथा परिणाम सर्वथा एक-दूसरे के विपरीत है. इससे यह सिद्ध होता है कि व्यक्ति पर प्रसिद्ध नाम नहीं बल्कि वास्तविक नाम का प्रभाव रहता है।
इसी से मिलता-जुलता एक अन्य प्रश्न उभरकर सामने आता है कि यदि किसी व्यक्ति को उसके नाम के आधार पर लाभ न मिल रहा हो तो उस व्यक्ति के नाम परिवर्तन का मापदण्ड क्या होना चाहिये:- राशि या अंक, जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं कि व्यक्ति आजीवन अपनी वास्तविक राशि के प्रभाव में रहता है, उसके प्रसिद्ध नाम की क्या राशि है इसका उस पर तनिक भी असर नहीं पड्ता है। हाँ अंक अवश्य भाग्य को दिशा देते है। अंको के माध्यम से ग्रह व्यक्ति को प्रभावित करते हैं क्योंकि प्रत्येक अंक किसी ग्रह के अधीन होता है जैसे कि 1-सूर्य (Sun), 2-चन्द्र (Moon ) व 3-गुरु (Jupiter ) इत्यादि. परन्तु हमें एक बात नहीं भूलनी चाहिये कि अंक केवल हमारे भाग्य को दिशा देते हैं, अन्तिम निर्णय जन्मपत्री में ग्रहों की स्थिति( Placement Of Planet In Birth Chart ) के आधार पर ही होता है।
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