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जन्मकुण्डली सही होने के बावजूद फलादेश सही क्यों नही होता - एक चिन्तन-1 (Why Wrong Predictions Inspite of Correct Birth Chart)
आजकल प्रायः देखने सुनने मे आता है कि विद्वान ज्योतिर्वेदो या कम्प्यूटर द्वारा बनी सही जन्मकुण्डली का फलादेश (Phaladesh) करने में बडे-बडे विद्वान एंव गणितज्ञ मात खा जाते हैं और फिर स्वंय को सही सिद्ध करने कि लिए कहते हैं कि जन्मकुण्डली गलत बनी है तथा इसमें (Retification of Chart) करने की आवश्यकता है. परन्तु वास्तविकता यह नहीं है, यद्यपि गणित और फलित दोनों ही ज्योतिष के अंग है फिर भी पश्चिमी देशो का गणित वैदिक पद्वति के गणित से उत्तम होने के बावजूद सही फलादेश करने में विफल (Substitute Of Prediction) क्यों है, इसके वास्तविक कारण पर हम प्रकाश डालेंगे.
आजकल प्रायः देखने सुनने मे आता है कि विद्वान ज्योतिर्वेदो या कम्प्यूटर द्वारा बनी सही जन्मकुण्डली का फलादेश (Phaladesh) करने में बडे-बडे विद्वान एंव गणितज्ञ मात खा जाते हैं और फिर स्वंय को सही सिद्ध करने कि लिए कहते हैं कि जन्मकुण्डली गलत बनी है तथा इसमें (Retification of Chart) करने की आवश्यकता है. परन्तु वास्तविकता यह नहीं है, यद्यपि गणित और फलित दोनों ही ज्योतिष के अंग है फिर भी पश्चिमी देशो का गणित वैदिक पद्वति के गणित से उत्तम होने के बावजूद सही फलादेश करने में विफल (Substitute Of Prediction) क्यों है, इसके वास्तविक कारण पर हम प्रकाश डालेंगे.
सबसे पहले हम गणित के सन्दर्भ में चर्चा करना चाहेंगे जोकि शुद्ध रुप से बुद्धि का विषय है. गणित के विषय में पारंगता प्राप्त करने के लिए व्यक्ति बिशेष का मात्र बौद्धिक स्तर अच्छा होना चाहिये. नैतिक एंव आध्यात्मिक गुणों(Moral & Spiritual Quality) का होना आवश्यक नहीं. आजकल एसे बहुत से माडर्न ज्योतिषी है जो एक हाथ में सिगरेट व दूसरे हाथ में ज्योतिष की किताब(Astrological Book) लेकर अध्ययन करते हैं. इनमें से कुछ महानुभाव तो शराब तक का सेवन करते है, अब ऎसे धुरन्धरो से फलादेश (Phaladesh) की उम्मीद करना बेमानी होगा. फिलहाल हम गणित की ही चर्चा करते है. लेखक का यह मानना है कि गणित-व्यवहार के लिए होता है, व्यवहार गणित के लिए नही. एक कहावत है "Excess of Every Thing is Bad" मेरे विचार से जन्मकुण्डली के लिए आवश्यक पदार्थों ग्रहो, नक्षत्रों, भावो (Planets, Nakshatra, House) इत्यादि की सामान्य गणना करने तक ही गणित प्रासांगिक है. गणित का अधिक पोस्टमार्टम न गणित और न ही फलित के लिए ठीक है. उदाहरण के लिए गणित के अनुसार प्रत्येक भाव का मध्य व सन्धि होती है. यदि कोइ ग्रह भाव मध्य को लाँघकर भाव सन्धि(Bhava Sandhi) में चला जाता है तो मूल कुण्डली में अपने भाव में रहने के बावजूद अगले भाव का फल देता है. मान लो किसी व्यक्ति का जन्म लग्न मेष(Aries Ascendant) है और भाग्य (नवम) स्थान का स्वामी (Lord Of Ninth House) बृहस्पति ग्रह नवम भाव (स्वराशी) का फल देगा, ग्रह बैठा तो अष्टम भाव (Eighth House) में है, परन्तु फल नवम भाव का भी देगा. नवम भाव में मूल, पू षा व ऊ षा नक्षत्र (Mula, Purbashadha & Uttarashadha Nakshatra) है, बृहस्पति ज्येष्ठा नक्षत्र ( Jupiter In Jestha Nakshatra) में है तो क्या धनु राशी में ज्येष्ठा नक्षत्र चला जायेगा या बृहस्पति धनुराशी के नक्षत्र को ग्रहण कर लेगा. सोचने पर कितना बेतुका और मूर्खतापूर्ण तर्क लगता है. लेकिन बडे-बडे गणितज्ञ इसी सिद्धान्त पर चल रहे हैं. अब ऎसे में उनका फलादेश (prediction) गड्बडा जाता है तो इसके लिए वो स्वंय जिम्मेवार है फलित ज्योतिष नहीं.
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