कुण्डली में चन्द्र और मंगल का योग (Moon and Mars combination in Horoscope)



ज्योतिषशास्त्र में चन्द्रमा को शुभ और सौम्य ग्रह के रूप में मान्यता प्राप्त है. मंगल को क्रूर और अशुभ ग्रहों के रूप में स्थान दिया गया है.

कुण्डली में जब इन दोनों ग्रहों के बीच योग बनता है तो व्यक्ति को इसका क्या फल मिलता है आइये इसे देखें.

चन्द्र प्रकृति (Chandra Prakrati)
चन्द्रमा कर्क राशि का स्वामी होता है. यह वृषभ राशि में उच्च का एवं वृश्चिक राशि में नीच का होता है. पृथ्वी के निकट होने के कारण व्यक्ति पर चन्द्रमा का प्रभाव भी जल्दी दिखाई देता है. ज्योतिष विधान में चन्द्रमा को सत्वगुणी एवं स्त्री स्वभाव का माना गया है यह मन का कारक ग्रह होता है. यह सूर्य से जितना दूर रहता हे उतना ही शुभ, शक्तिशाली और बलवान होता है. यह सूर्य से जितना निकट होता है उतना ही कमज़ोर और मंद होता है.

मंगल प्रकृति (Mangal Prakrati)
यह मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी होता है. यह पुरूष ग्रह है. यह तमोगुण को धारण करता है. मकर राशि में यह उच्च का होता है जबकि चन्द्रमा की राशि यानी कर्क राशि में नीच का होता है. मंगल के लिए मेष मूल त्रिकोण राशि है. यह शक्ति, सामर्थ्य एवं साहस का प्रतीक होता है. उच्च का मंगल होने पर यह साहस एवं सामर्थ्य का उपयोग सकारात्मक दिशा में करने हेतु प्रेरित करता है जबकि नीच और अशुभ स्थिति में शक्तिहीन बनाता है एवं नीच कार्यों के लिए प्रेरित करता है.

चन्द्र मंगल का अशुभ योगफल (Auspicious combination of Moons and Mars)
चन्द्र और मंगल दोनों अलग अलग गुणों को धारण करते है और इनकी प्रकृति भी अलग है फिर भी चन्द्रमा मंगल के प्रति मित्रता रखता है. चन्द्रमा मन पर अधिकार रखता है. उग्र प्रकृति का होने के कारण चन्द्रमा के साथ मंगल का योग व्यक्ति को क्रोधी और उग्र बनाता है. यह योग अशुभ प्रभाव में होने पर मन अस्थिर और विचलित रहता है. व्यक्ति में एकाग्रता की कमी रहती है. यह योग व्यक्ति में चारित्रिक दोष उत्पन्न कर सकता है. कुण्डली में चन्द्र मंगल का अशुभ योग बनने पर व्यक्ति अनैतिक तरीके से धन अर्जन करने से भी परहेज नहीं करता.

चन्द्र मंगल का शुभ योग फल (Inauspicious combination of Moons and Mars)
कुण्डली में चन्द्रमा और मंगल मिलकर शुभ योग का निर्माण करता है तो व्यक्ति को उत्तम प्रभाव देता है. मंगल व्यक्ति को सामर्थ्यवान और शक्तिशाली बनाता है तो चन्द्रमा बुद्धिमान बनाता हैं एवं मन को एकाग्रता प्रदान करता है. इन गुणों के कारण व्यक्ति समाज एवं परिवार में सम्मान व आदर प्राप्त करता है. इस उत्तम योग के कारण व्यक्ति की आर्थिक स्थिति भी अच्छी रहती है.

चन्द्र मंगल युति और विवाह (Combination of Moons and Mars Marriage)
शुक्र को सामान्य रूप से काम कारक माना जाता है परंतु स्त्रियों में मंगल को भी काम कारक के रूप में देखा जाता है. जिस स्त्री की कुण्डली में मंगल और चन्द्र पर अशुभ ग्रहों की दृष्टि होती है उनके सुखमय वैवाहिक जीवन में बाधा आती है. ग्रहों की ऐसी स्थिति जिस स्त्री की कुण्डली में पायी जाती है उनकी शादी में काफी परेशानी आती है. इनकी शादी विलम्ब से होती है. पति के साथ मधुर सम्बन्ध नहीं रहता है. ग्रहों की ऐसी स्थिति होने पर मतभेद के कारण पति पत्नी को अदालत के चक्कर भी लगाने पड़ सकते हैं ऐसा ज्योतिषशास्त्र का विधान कहता है.

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