मकर लग्न की कुण्डली में लग्नस्थ ग्रह (Planets in Capricorn Ascendant)



मकर लग्न में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वे दुबले पतले होते हैं. समान्यतया इनकी शादी विलम्ब से होती है. इन्हें नियम और अनुशासन पर चलना पसंद होता है. ये थोड़े से जिद्दी और रूढ़िवादी होते हैं.
ये अपने कार्यों में किसी का हस्तक्षेप पसंद नहीं करते हैं. मकर लग्न में लग्नस्थ ग्रह इन्हें किस प्रकार से प्रभावित करते हैं यह देखिए!

मकर लग्न में लग्नस्थ सूर्य (Sun placed in Capricorn ascendant)
सूर्य मकर लग्न की कुण्डली में अष्टम भाव का स्वामी होता है (Sun becomes the lord of the eighth house in a birth-chart of Capricorn ascendant). लग्न भाव में सूर्य की स्थिति होने से व्यक्ति को स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना होता है. हड्डियों में दर्द एवं पेट सम्बन्धी रोग की संभावना प्रबल रहती है. दृष्टि दोष की भी संभावना रहती हैं. लालच और स्वार्थ की भावना रहती है. शत्रु राशि में सूर्य की उपस्थिति होने के कारण जीवन में कठिन परिस्थितियों एवं बाधाओं का सामना करना होता है. परिश्रम और आत्मबल से कठिनाईयों पर विजय प्राप्त करते हैं. पिता से तनाव होता है. सगे सम्बन्धियों से भी विरोध का सामना करना होता है. व्यापार की अपेक्षा नौकरी करना पसंद होता है. गृहस्थी में उतार चढ़ाव होता रहता है.

मकर लग्न में लग्नस्थ चन्द्र (Moon in Capricorn Ascendant)
चन्द्रमा मकर लग्न की कुण्डली में सप्तम भाव का स्वामी होता है. शत्रु राशि में लग्नस्थ होकर चन्द्रमा व्यक्ति को सुन्दर काया प्रदान करता है (Moon gives the native an attractive appearance when placed in Capricorn ascendant). चन्द्र के प्रभाव से व्यक्ति का मन चंचल और विनोदी होता है. सौन्दर्य के प्रति आकर्षित होता है. चन्द्र के शत्रु राशि में होने से आंख और कान में तकलीफ का सामना करना होता है. लग्न में बैठा चन्द्र सप्तम भाव में अपनी राशि कर्क को देखता है जिससे जीवनसाथी सुन्दर और गुणी प्राप्त होता है. जीवनसाथी से सहयोग एवं समय समय पर लाभ प्राप्त होता है.

मकर लग्न में लग्नस्थ मंगल (Mars in Capricorn ascendant)
मकर लग्न की कुण्डली में मंगल सुखेश और लाभेश होता है. मंगल इस  इस राशि में लग्नस्थ होने से यह व्यक्ति क्रोधी स्वभाव का होता है (Mars gives the native an angry disposition when placed in Capricorn). इन्हें अपना वर्चस्व बनाये रखना पसंद होता है. पिता एवं पिता पक्ष से सहयोग प्राप्त होता है. पिता के नाम से इन्हें समाज में मान सम्मान एवं आदर प्राप्त होता है. शनि के प्रभाव से जीवन के उत्तरार्द्ध में संभावना ऐसी बनती है कि पिता से विवाद के कारण इन्हें पैतृक सम्पत्ति का त्याग करना होता है. प्रथम भाव में बैठा मंगल चतुर्थ सप्तम एवं अष्टम भाव को देखता है. इन भावो पर मंगल की दृष्टि के कारण व्यक्ति धार्मिक प्रवृति का होता है. मंगली दोष के कारण गृहस्थ जीवन का सुख बाधित होता है.

मकर लग्न में लग्नस्थ बुध (Mercury in Capricorn Ascendant)
बुध मकर लग्न लग्न की कुण्डली में षष्ठेश और नवमेश होता है (Mercury becomes the lord of the sixth and the ninth house in a Capricorn kundali).  बुध लग्नस्थ होने से व्यक्ति बुद्धिमान और ज्ञानी होता है. इन्हें राजकीय सेवा का अवसर प्राप्त होता है. इनमें ईश्वर के प्रति आस्था और दया की भावना रहती है. कला के प्रति अभिरूचि होती है. मान सम्मान एवं यश प्राप्त होता है. आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है. सप्तम भाव में स्थित कर्क राशि पर बुध की दृष्टि होने से जीवनसाथी सुन्दर होता है. षष्ठेश की दृष्टि सप्तम भाव पर होने से जीवनसाथी का स्वभाव उग्र होता है. संतान प्राप्ति में विलम्ब होता है.

मकर लग्न में लग्नस्थ गुरू (Jupiter in Capricorn Ascendant)
मकर लग्न की कुण्डली में गुरू व्ययेश और तृतीयेश होकर अकारक ग्रह की भूमिका निभाता है. लग्न में गुरू की उपस्थिति से व्यक्ति ज्ञानी और गुणवान होता है. इनकी बौद्धिक क्षमता उत्तम होती है परंतु ये अपने गुण और योग्यता का समुचित उपयोग नहीं कर पाते हैं. दूसरों के विचारों से सदैव प्रभावित रहते हैं जिसके कारण कठिनाईयो का भी सामना करना होता है. लग्नस्थ गुरू की दृष्टि पंचम, सप्तम एवं नवम भाव पर रहती है. गुरू की दृष्टि से विवाह के पश्चात इनका भाग्योदय होता है.

मकर लग्न में लग्नस्थ शुक्र (Venus in Capricorn ascendant)
शुक्र मकर लग्न की कुण्डली में पंचमेश और सप्तमेश होता है. इस लग्न के लिए शुक्र शुभ कारक ग्रह होता है (Venus is a benefic planet for a kundali of Capricorn ascendant). लग्न में इसकी उपस्थिति से व्यक्ति सुन्दर और बुद्धिमान होता है. शुक्र इन्हें चंचल और स्वार्थी बनता है. इनमें अवसरवादिता भी होती है. ये आमतौर पर अपने मतलब से दोस्ती करते हैं. विपरीत लिंग वाले व्यक्ति के प्रति इनमें विशेष आकर्षण होता है. सप्तम भाव में स्थित कर्क राशि पर शुक्र की दृष्टि होने से जीवनसाथी प्यार करने वाला होता है. सुख दु:ख में सहयोग और साथ देता है.

मकर लग्न में लग्नस्थ शनि (Saturn placed in Capricorn ascendant)
शनि मकर लग्न की कुण्डली में लग्नेश और द्वितीयेश होता है. लग्नेश होने से यह शुभ और कारक ग्रह होता है. लग्न में शनि की उपस्थिति से व्यक्ति भाग्यशाली होता है (Saturn in the Capricorn ascendant makes a person lucky). शारीरिक तौर पर हृष्ट पुष्ट और शक्तिशाली होते है परंतु वाणी सम्बन्धी दोष की संभावना रहती है. नौकरी एवं व्यापार दोनो में इन्हें अच्छी सफलता मिलती है. राजकीय सेवा का इन्हें अवसर प्राप्त होता है. माता से स्नेह प्राप्त होता है.  सप्तम भाव पर शनि की दृष्टि होने से जीवनसाथी को कष्ट होता है. वैवाहिक जीवन का सुख प्रभावित होता है.

मकर लग्न में लग्नस्थ राहु (Rahu in Capricorn ascendant)
राहु मकर लग्न की कुण्डली प्रथम भाव में उपस्थित होने से जीवन में स्थायित्व का अभाव होता है. अकारण भटकाव होता है. कार्यो में बाधाएं आती है जिससे बनता हुआ काम बिगड़ जाता है. व्यापार की अपेक्षा नौकरी इनके लिए लाभप्रद होता है. व्यवसाय में कठिनाईयां आती है और हानि की संभावना रहती है. सप्तम भाव पर राहु की दृष्टि साझेदारों एवं मित्रों से अपेक्षित सहयोग में बाधक होता है. गृहस्थ जीवन के सुख में न्यूनता लाता है.

मकर लग्न में लग्नस्थ केतु (Ketu in Capricorn ascendant)
मकर लग्न की कुण्डली में केतु प्रथम भाव में स्थित होने से व्यक्ति के स्वास्थ्य में उतार चढ़ाव होता रहता है. समय समय पर विभिन्न प्रकार की कठिनाईयों एवं मुश्किलों का सामना करना होता है. विपरीत लिंग वाले व्यक्ति के प्रति विशेष आकर्षण होता है. शत्रुओं के कारण इन्हें कष्ट होता है. समाज में मान सम्मान के लिए अनुचित साधनों का प्रयोग करते हैं जिसके कारण अपयश का भागी बनना पड़ता है. सप्तम भाव पर केतु की दृष्टि जीवनसाथी को कष्ट देता है. जीवनसाथी से सुख एवं सहयोग में कमी लाता है.

Tags

Categories


Please rate this article:

2.09 Ratings. (Rated by 35 people)