लग्नस्थ ग्रहों का प्रभाव मीन लग्न में (Predictions for Planets Placed in Pisces Ascendant)



मीन लग्न का स्वामी गुरू होता है. इस लग्न में चन्द्र, मंगल और गुरू कारक ग्रह होते हैं. सूर्य, बुध, शुक्र एवं शनि इस लग्न में अकारक ग्रह बनकर मंदा फल देते हैं.
आपका जन्म मीन लग्न मे हुआ है और लग्न में कोई ग्रह है तो उस गह का प्रभाव जीवन पर्यन्त आप पर बना रहेगा.  ग्रहो के अनुरूप मिलने वाला फल इस प्रकार है जैसे.

मीन लग्न में लग्नस्थ सूर्य का प्रभाव (Impact of Sun placed in Pisces Ascendant)
सूर्य मीन लग्न की कुण्डली में षष्ठेश होता है. छठे भाव का स्वामी होने से सूर्य अकारक हो जाता है (As the sixth lord, Sun becomes malefic when in Pisces Ascendant kundali). मीन लग्न में लग्नस्थ होकर सूर्य व्यक्ति को स्वस्थ और नीरोग बनाता है. जिनकी कुण्डली में यह स्थिति होती है वह आत्मविश्वासी और परिश्रमी होते हैं. किसी भी कार्य को पूरे मनोयोग से करते हैं. शत्रुओं और विरोधियो से डरते नहीं हैं. सूर्य की पूर्ण दृष्टि सप्तम भाव में कन्या राशि पर होती है. व्यापार की अपेक्षा नौकरी में इन्हें कामयाबी मिलती है. वैवाहिक जीवन में जीवनसाथी से अनबन के कारण गृहस्थी का सुख प्रभावित होता है.

मीन लग्न में लग्नस्थ चन्द्र का प्रभाव (Moon placed in Pisces Ascendant)
मीन लग्न की कुण्डली में चन्द्रमा पंचमेश होता है. इस लग्न में त्रिकोणेश होने से चन्द्रमा शुभ कारक ग्रह होता है (Due to the lordshipt of the trine fifth house, Moon gives auspicious result in Pisces ascendant). लग्न में इसकी स्थिति व्यक्ति के लिए सुखद और शुभ होता है. चन्द्रमा के प्रभाव से व्यक्ति सुन्दर और आकर्षक व्यक्तित्व का स्वामी होता है. इनकी वाणी मधुर और प्रभावशाली होती है. इनमें आत्मविश्वास रहता है जिससे किसी भी कार्य से घबराते नहीं हैं. मातृ पक्ष एवं माता से सुख और स्नेह प्राप्त होता है. चन्द्र पूर्ण दृष्टि से बुध की राशि कन्या को देखता है. इसके प्रभाव से जीवनसाथी और संतान पक्ष से सुख एवं सहयोग प्राप्त होता है.

मीन लग्न में लग्नस्थ मंगल का प्रभाव (Mars placed in Pisces Ascendant)
मंगल मीन लग्न की कुण्डली में द्वितीय और नवम भाव का स्वामी होता है (When mars is in Pisces ascendant it is the lord of the second and the ninth house). लग्न में इसकी उपस्थिति से व्यक्ति शक्तिशाली और पराक्रमी होता है. यह व्यक्ति को जिद्दी बनाता है. अध्यात्म में इनकी रूचि होती है. दूसरो की मदद करने में आगे रहते हैं. इनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ रहती है. धन अपव्यय नहीं करते हैं. इन्हें दृष्टि दोष और कर्ण दोष होने की संभावना रहती है. प्रथम भाव में स्थित मंगल चतुर्थ, सप्तम एवं अष्टम भाव को अपनी दृष्टि से प्रभावित करता है. इसके प्रभाव से मित्रों एवं साझेदारों से लाभ प्राप्त होता है. माता एवं माता समान महिला से स्नेह और सहयोग प्राप्त होता है.

मीन लग्न मे लग्नस्थ बुध का प्रभाव (Mercury in Pisces ascendant)
बुध मीन लग्न की कुण्डली में चतुर्थ और सप्तम भाव का स्वामी होकर केन्द्राधिपति दोष से दूषित होता है. लग्न में बुध की उपस्थिति से व्यक्ति परिश्रमी होता है (A person is a hard-worker due the presence of Mercury in the Pisces ascendant). अपनी मेहनत और बुद्धि के बल पर धन अर्जित करता है. पैतृक सम्पत्ति से इन्हें विशेष लाभ नहीं मिल पाता है. महिलाओं से इन्हें विशेष सहयोग और लाभ मिलता है. लग्न में बैठा बुध सप्तम भाव में अपनी राशि को देखता है. इसके प्रभाव से व्यापार एवं कारोबार में मित्रों एवं साझेदारों से सहयोग प्राप्त होता है. गृहस्थ जीवन सुखमय रहता है. अनुकूल जीवनसाथी प्राप्त होता है जिनसे सहयोग मिलता है.

मीन लग्न में लग्नस्थ गुरू का प्रभाव (Placement of Jupiter in Pisces ascendant)
गुरू मीन लग्न की कुण्डली में लग्नेश और दशमेश होता है. लग्नेश होने के कारण दो केन्द्र भाव का स्वामी होने पर भी इसे केन्द्राधिपति दोष नहीं लगता (Due to its lordship of the ascendant, Jupiter does not get Kendra-adhipati dosha even though it is lord of two Kendra houses). लग्न में इसकी उपस्थिति होने से व्यक्ति अत्यंत भाग्यशाली होता है. शारीरिक तौर पर स्वस्थ और सुन्दर होता है. स्वभाव से दयालु और विनम्र रहता है. धर्म के प्रति आस्थावान और आत्मविश्वास से परिपूर्ण रहता है. लग्नस्थ गुरू अपनी पूर्ण दृष्टि से पंचम, सप्तम एवं नवम भाव को देखता है. इसके प्रभाव से पिता एवं संतान से सुख प्राप्त होता है. गृहस्थ जीवन सुखमय होता है.

मीन लग्न में लग्नस्थ शुक्र का प्रभाव (Venus placed in Pisces Ascendant)
शुक्र मीन लग्न की कुण्डली में तृतीय और अष्टम भाव का स्वामी होता है. इस लग्न की कुण्डली में यह अकारक होता है (Venus has a negative impact when placed in Pisces ascendant). इस लग्न में शुक्र प्रथम भाव में होने से व्यक्ति सुन्दर और आकर्षक व्यक्तित्व का स्वामी होता है. इन्हें वात रोग होने की संभावना रहती है. अपने काम में ये निपुण होते हैं. ये साहसी और पराक्रमी होते हैं. ये किसी भी चीज़ को गहराई से जाने बिना संतुष्ट नहीं होते. माता से सुख और सहयोग की संभावना कम रहती है. संतान के संदर्भ में कष्ट होता है. सप्तम भाव पर शुक्र की पूर्ण दृष्टि होने से गृहस्थ जीवन समान्यत: सुखमय रहता है.

मीन लग्न में लग्नस्थ शनि का प्रभाव (Impact of Saturn placed in Pisces ascendant)
शनि मीन लग्न की कुण्डली में एकादशेश और द्वादशेश होता है. लग्न भाव में शनि की उपस्थिति होने से व्यक्ति दुबला पतला होता है (The native is thin due to the impact of Saturn in the Pisces ascendant). शनि के प्रभाव से व्यक्ति नेत्र रोग से पीड़ित होता है. इन्हें स्वतंत्र निर्णय लेने में कठिनाई होती है. जीवन में प्रगति हेतु दूसरों से सलाह एवं सहयोग इनके लिए अपेक्षित होता है. धन संचय की प्रवृति होती है. शेयर, सट्टा एवं लांटरी से इन्हें कभी कभी अचानक लाभ मिलता है. लग्नस्थ शनि तृतीय भाव में वृष राशि को, सप्तम भाव मे कन्या राशि को एवं दशम भाव में गुरू की राशि धनु को देखता है. इन भावों में शनि की दृष्टि होने से मित्रों से अपेक्षित लाभ और सहयोग नहीं मिल पाता है. साझेदारों से हानि होती है. दाम्पत्य जीवन में कष्ट की अनुभूति होती है।

मीन लग्न में लग्नस्थ राहु का प्रभाव (Rahu placed in Pisces Ascendant)
राहु मीन लग्न की कुण्डली में लग्नस्थ होने से व्यक्ति हृष्ट पुष्ट काया का स्वामी होता है. राहु इन्हें चतुर और चालाक बनाता है. इनमें स्वार्थ की भावना रहती है. अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए ये किसी से मित्रता करते हैं. अपना काम किस प्रकार से निकालना चाहिए इसे अच्छी तरह समझते हैं. इनमें साहस भरपूर होता है. लग्नस्थ राहु सप्तम भाव में स्थित बुध की कन्या राशि को देखता है (Rahu in Pisces Lagna aspects Virgo which is the seventh house). इसके प्रभाव से संतान के संदर्भ में कष्ट की संभावना रहती है. जीवनसाथी स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों से पीड़ित होता है. गृहस्थी में कठिनाईयों का सामना करना होता है.

मीन लग्न में लग्नस्थ केतु का प्रभाव (Ketu placed in Pisces ascendant)
केतु मीन लग्न की कुण्डली में लग्नस्थ होने से व्यक्ति स्वास्थ सम्बन्धी परेशानियों से पीड़ित होता है. कमर दर्द और वात रोग होने की संभावना रहती है (Ketu causes health related problems when in Pisces Ascendant). आत्मविश्वास का अभाव होता है. स्वतंत्र निर्णय लेने में इन्हें कठिनाई होती है. व्यापार की अपेक्षा नौकरी करना इन्हें पंसद होता है. स्वार्थ सिद्धि के लिए सामाजिक नियमों का उलंघन करने से भी परहेज नहीं करते.  सप्तम भाव पर केतु की दृष्टि जीवनसाथी के लिए कष्टकारी होता है. केतु इन्हें विवाहेत्तर सम्बन्ध की ओर प्रेरित करता है फलत: गृहस्थ जीवन का सुख प्रभावित होता है. आर्थिक स्थिति सामान्य होती है.

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