जैमिनी ज्योतिष से व्यवसायिक स्थिति (Analysing Business From Jaimini Astrology)



ज्योतिषशास्त्र ऐसा विज्ञान है जो भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालों को देखने की क्षमता रखता है.व्यक्ति के जीवन में होने वाली प्रत्येक घटनाओं के विषय में ज्योतिषशास्त्र (Jaimini  Astrology) फलकथन करने की योग्यता रखता है.नौकरी हो अथवा व्यवसाय किस क्षेत्र में व्यक्ति को कैसी सफलता मिलेगी यह सब ज्योतिष से ज्ञात किया जा सकता है.

आपके लिए व्यवसाय में कैसी स्थिति रहेगी इस विषय का आंकलन आप चाहें तो जैमिनी (Jaimini astrology) महोदय के बताये विधि से ज्ञात कर सकते हैं.जैमिनी महोदय की विधि अमात्यकारक (Amatya Karak) पर निर्भर करती है.इस विधि में आपको अपनी कुण्डली में अमात्यकारक की स्थिति को देखना होता है.आमात्यकारक कुण्डली में लग्न से किस स्थिति यानी किस भाव में बैठा है.अमात्यकारक पर किस किस ग्रह की दृष्टि (Aspect on Amatyakarak) पड़ रही है.अमात्यकारक से ग्रहों की किस प्रकार की युति है (Planetary Conjunction With AmatyaKarak). इन सभी तथ्यों के आधार पर कारोबार में सफलता असफलता एवं लाभ हानि को ज्ञात किया जा सकता है.

जैमिनी ज्योतिष  (Jaimini astrology)  के अनुसार आपकी कुण्डली में अमात्यकारक लग्न से केन्द्र, त्रिकोण (Trine Houses) अथवा एकादश भाव में स्थित है तो आपके लिए व्यवसाय में उत्तम स्थिति का संकेत समझना चाहिए.इस स्थिति में अगर आप व्यवसाय करते हैं तो आप व्यवसाय में निरन्तर आगे बढ़ते जाएंगे और कामयाबी की राह में बिना किसी बाधा या परेशानी के कामयाबी के पायदान पर चढ़ते जाएंगे.ग्रह की दृष्टि के विषय में यह नियम है कि अमात्यकारक पर जिस ग्रह की दृष्टि होगी उस ग्रह के स्वभाव और गुण के अनुसार फल प्राप्त होता है.अमात्यकारक पर अगर शुभ ग्रहों की दृष्टि है तो व्यापार के लिए शुभ संकेत समझना चाहिए और अगर अशुभ ग्रहों की दृष्टि है तो व्यापार में असफलता और रूकावट का संकेत समझना चाहिए.इसी प्रकार अमात्यकारक के साथ ग्रहों की शुभ युति में व्यापार सफल होता है और कामयाबी मिलती है जबकि अशुभ ग्रहों की युति होने पर व्यापार में सफलता नहीं मिल पाती है।

अगर आपकी कुण्डली में अमात्यकारक अशुभ ग्रह है (Malefic Amatyakarak) और उस पर अशुभ ग्रहों की दृष्टि है साथ ही अगर वह अशुभ स्थान पर विराजमान है तो व्यवसाय में सफलता और असफलता का क्रम चलता रहता है.जन्मपत्री में अमात्यकारक शुभ ग्रह हो और इनपर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तथा यह शुभ स्थान पर विराजमान हों तो ऐसी स्थिति में आपको व्यापार में सदैव सफलता मिलती है और आप कामयाब व्यापारी होते हैं.यह तथ्य स्मरणीय है कि अमात्यकारक षष्ठेश से सम्बन्ध रखता है (Amatyakarak has a relation with the sixth-lord) और अष्टमेश से सम्बन्ध नहीं रखता है तो व्यापार में सफलता मिलने की संभावना रहती है परंतु इसके लिए संघर्षशील और परिश्रमी होना पड़ता है.

इस प्रकार आप अपनी कुण्डली में अमात्यकारक की स्थिति को देखकर व्यापार में अपनी स्थिति का आंकलन कर सकते हैं.

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